Menstrual hygiene day

माँ आस्तिक है
और मैं नास्तिक
ये भेद सुबह की आरती में
खुलता है रोजाना
जब माँ पूजा करती है
मैं तकिये से कान ढक लेती हूँ
लेकिन फिर भी
पड़ोस कि लड़कियों कि तरह
मुझे एक निश्चित वक्त पर
आचार खाने-छुने की मनाही नहीं है
पड़ोस वाली भाभी कि तरह
मेरा रसोईघर में प्रवेश निषेध नहीं किया जाता
किसी भी और स्त्री की भांति
मेरे साथ छुआ-छात नहीं किया जाता
महीने के किसी भी दिन
पूरे परिवार के लिए
मन मर्ज़ी का खाना
बनाती और खिलाती हूँ
माँ कहती हैं
“कुरीतियों और आस्था का कोई संबंध नहीं है”

  • chhaya gautam
    बदलाव खुद से ही आएगा
    menstrual hygiene day

हम

कब हुआ था हमारा जन्म

शायद तब

जब तुमने स्पर्श किया

मेरा मन

और बदल दिया

मैं और तुम का सर्वनाम

‘हम’ से

या शायद तब

जब तुम्हारे

‘मैं’ भरे अभिमान में

जगह दी

मेरे स्वाभिमान को

और बदल दिया

पसंद – नापसंद का

अनुपात

✍ त्रासदी

Agrsen ki Baoli -Delhi ,India

[scroll to read in hindi/हिंदी में पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें]

Agrsen ki Baoli also known as Ugrsen ki baoli designated as a protected monument by the Archaeological Survey of India. It is a 60 meter long and 50 meter wide historical step well on Hailey Road ,near Cannaught Place ,Jantar Mantar ,New Delhi,India. The Baoli is open daily from 9 AM to 5:30 PM.

With 108 Steps Agrasen ki Baoli is definitely an architectural marvel. It has three stories and 108 steps which goes down to the well. Agrasen Ki Baoli also has a resemblance to the baolis or baodis (stepwells) in Gujarat and Rajasthan.

How to reach baoli when you are first time going there ?

The most simplest way is Metro you just need to reach Jantar Mantar metro station come outside from any gate and then take an auto you just need to tell the auto driver that you want to go Agrsen/Ugrsen ki Baoli and he will drop you .If you want to avoid metro which i do sometimes, there are other ways too from which you can visit there. Either you can book a cab and it will drop you to Baoli or you can directly took an auto for there by that you can skip metro. If you are thinking to going there by your vehicle  just need to search it on google map. And if you are well aware of Delhi you can took bus which is the most cheapest way to reach there.

Baoli is historical place but there are something else it is famous for , there are rumors that it is a haunted place,but it is not proven yet.
The location has been used to shoot scenes from various Bollywood films such as the blockbuster film PK starring Amir Khan and Sultan starring Salman Khan. It was also featured in the 2017 Sridevi thriller Mom.There have also been reports of the Baoli being haunted. In 2012, a photo-shoot of Formula One models also took place here.

Agrasen Ki Baoli is a popular tourist destination. Hope You visit there .

You can ask Questions in Comment box.

अग्रसेन की बावली को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक के रूप में उग्रसेन की बावली के रूप में भी जाना जाता है। यह कनॉट प्लेस, जंतर मंतर, नई दिल्ली, भारत के पास हैली रोड पर एक 60 मीटर लंबा और 50 मीटर चौड़ा ऐतिहासिक कदम है। बाओली रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुली रहती है।

108 स्टेप्स के साथ अग्रसेन की बावली निश्चित रूप से एक वास्तुशिल्प चमत्कार है। इसकी तीन कहानियां और 108 कदम हैं जो कुएं तक जाती हैं। अग्रसेन की बावली का गुजरात और राजस्थान में बाओलिस या बाओडिस (स्टेपवेल्स) से भी मेल खाता है।

जब आप पहली बार वहां जा रहे हों तो बाओली तक कैसे पहुंचें?

सबसे सरल तरीका मेट्रो है जिसे आपको बस जंतर मंतर मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने की आवश्यकता है, किसी भी गेट से बाहर आएँ और फिर एक ऑटो लें आपको ऑटो चालक को बताना होगा कि आप एग्रसेन / उग्रसेन कोली जाना चाहते हैं और वह आपको छोड़ देगा। यदि आप आप मेट्रो से बचना चाहते हैं जो मैं कभी-कभी करता हूं, ऐसे अन्य तरीके भी हैं जिनसे आप वहां जा सकते हैं। या तो आप कैब बुक कर सकते हैं और यह आपको बाओली तक ले जाएगा या आप सीधे वहां के लिए एक ऑटो ले सकते हैं जिससे आप मेट्रो छोड़ सकते हैं। अगर आप अपने वाहन से वहां जाने की सोच रहे हैं तो बस इसे गूगल मैप पर सर्च करना होगा। और अगर आप दिल्ली से अच्छी तरह से वाकिफ हैं तो आप बस ले सकते हैं जो वहाँ पहुँचने का सबसे सस्ता साधन है।

इस pic को google से लिया

बावली ऐतिहासिक जगह है, लेकिन कुछ और भी हैं जिनके लिए यह प्रसिद्ध है, अफवाहें हैं कि यह एक प्रेतवाधित स्थान है, लेकिन यह अभी तक साबित नहीं हुआ है।
इस स्थान का उपयोग विभिन्न बॉलीवुड फिल्मों जैसे कि आमिर खान द्वारा अभिनीत ब्लॉकबस्टर फिल्म पीके और सलमान खान अभिनीत सुल्तान के दृश्यों को शूट करने के लिए किया गया है। इसे 2017 में श्रीदेवी की थ्रिलर मॉम में भी दिखाया गया था। इसके अलावा बाओली के भुतहा होने की भी खबरें हैं। 2012 में, फॉर्मूला वन मॉडल का फोटो-शूट भी यहां हुआ।

अग्रसेन की बावली एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। आशा है कि आप वहां जाएंगे।

आप कमेंट बॉक्स में सवाल पूछ सकते हैं।

 

प्रेम पर कवितायें

सोचा लिख दूँ
प्रेम पर कवितायें
परंतु तुम्हारे प्रति
मेरा प्रेम
कुछ कविताओं मे
वर्णित ना किया गया
सोचा लिख दूँ
प्रेम पर लेख
लेकिन एक शीर्षक में
तुम्हें समेटना
नामुमकिन है
सोचा लिख दूँ
प्रेम पर अध्याय
किन्तु तुम सार हो
मेरे जीवन के
Chhaya Gautam

Again late …..

तुम्हें वक्त देखना नहीं आता तो घड़ी पहनते ही क्यों हो और अगर घड़ी देखने का वक्त नहीं होते व्यस्त होते हो तो अलार्म सेट कर लिया करो लंच पर मिलन था हमे डिनर का वक्त हो गया है अब {गुस्से में उसने बोला}

हाँ हाँ ठीक है अगली बार से नहीं होगा ऐसा वादा रहा {अपने कान पकड़ते हुए मैंने बोला}

कब से मेरा दिमाग खाया जा रहा है अब नहीं लग रही भूक | चलो अब जल्दी {उसका हाथ पकड़के चलते हुए मैंने कहा}

साथ चलें ही थे कि कुछ दूरी पर हमें दिखा एक पार्क और रुक गए दोनों यादों के भवर में कैसे बचपन में स्कूल के बाद घर आते वक्त झूलते थे और कॉलेज में भी यही सब जारी रहा ऐसे ही किसी पार्क में,नौकरी कि दौड़ ने हम सें ये सब जाने कब छीन लिया |

जन्मदिन पर

ITTEFAKAN SALGIRAH PR —Chhaya gautam

“मैम कोरियर आया है” दीपेश ने बोला

“किसने और कहाँ से भेजा है ?”  वेदिका ने पूछा

“किसी श्री मान सिंह ने भेजा है |” दीपेश ने बोला

“अच्छा ठीक है, रख दो |” वेदिका ने कहा .

“मैम मेज पर रख रहा हूँ |” दीपेश ने बोला

वेदिका ने उलट-पलट कर देखा और फिर दोबारा टेबल पर रखते हुए कुछ सोचने लगी| सिंह से उसे सिर्फ एक ही इंसान का चेहरा याद आ रहा था | वो चेहरा था विशाल का| और कौन था जो आज के दिन उसे कुछ भेज सकता था| एक विशाल ही तो था जिसने उसके स्कूल से लेकर कॉलेज तक उसके सभी जन्मदिन खास बनाए थे| वेदिका से भी ज्यादा अगर किसी को उसके जन्मदिन की खुशी थी तो वो था विशाल वैसे भी और किसी को कहाँ पता था की आज उसका जन्मदिन था| कॉलेज और स्कूल के दोस्तों से अब उसकी बात सिर्फ फेस्बूक के कॉमेंट बॉक्स में होती थी| और जन्मदिन की कुछ एक पोस्ट उसने सुबह हैशटैग hbd भी उसे मिल गई थी और कुछ एक whtsup स्टैटस भी| और आज कल के व्यस्त जीवन में कौन किसी का इतना ध्यान रखता है| वेदिका ये सब सोच ही रही थी और उसका ध्यान गया घड़ी पर उसकी मीटिंग का वक्त हो गया था | फिर उस कौरियर को वही छोड़ वो चली गई| दो घंटे बाद जब वो मीटिंग से वापिस आा रही ती तो बहुत खुश हुई क्योंकि अब वो उस कोरियर को खोल सकती थी| अपने कैबिन में जाकर जब वेदिका ने देखा तो वहाँ कुछ नहीं था|

“दीपेश मेरे जन्मदिन का तोहफा कहाँ जो विशाल ने भेजा है?”. वेदिका ने गुस्से मे बोला

“मैम कौन-सा तोहफा?” दीपेश ने बोला

“वही दीपेश जो इस मेज पर रखा था ” वेदिका ने गुस्से में चीखते हुए बोला .

“मैम वो गलती से यहाँ आ गया था, कोरियर वाला गलती से यहाँ आ गया था |” दीपेश ने बोला

 

The end

कैसे करूँ मैं ब्यान

वो चीखना -चिल्लाना
वेहशियत दिखाना
शोर मचाना
हाथ मुझ पर उठाना
कैसे करूँ मैं ब्यान
 
वो रात भर की मेरी सिस्कीयाँ
नीले निशान मेरे बदन पर पड़ जाना
कोई आवाज ना करना
चुपचाप सब सहते जाना
कैसे करूँ मैं ब्यान
 
वो बेल्ट देख
चीख मेरी निकल जाना
घर के एक कोने में
दिन गुजर जाना
कैसे करूँ मैं ब्यान
 
हर कोशिश का नाकामी बन जाना
रिश्ते का बोझ अकेले उठाना
सच सबसे छुपाना
बस सब खुद को समझाना
कैसे करूँ मैं ब्यान
 
लहसुन के छिलके की तरह
मेरी चोट की पपड़ियों का उतरना
रूह तक ज़्खमों का होना
कैसे करूँ मैं ब्यानa

यमुना घाट की शाम ….

 

छाया गौतम

सचिवालय के बस स्टॉप पर मे बस न. 623 से उतर गई, वहा से कहा जाया जाए नहीं सोचा था , घर छोड़ते वक्त जब गुस्से से दरवाजा बंद किया था तब कहा सोच था की कोई रोकेगा ही नहीं । अब आ तो गई थी लेकिन कौन सोचता है घर गुस्से मे छोड़ते वक्त | ये गुस्सा आपकी सभी सोचने की समझ को खराब करना जानता है वो भी बड़े प्यार से और वो भी ऐसा वैसा प्यार नही| वो प्यार जो सर चड़ कर बोलता है| बस स्टॉप पर आधे घंटे आते जाते लोगों को देखते हुए। मैं ऊब गई थी तो पास की सीढ़ियों से नीचे उतरती हुई जा बेठी यमुना के घाट पर , वैसे इसे नदी कहना गलत था क्योंकि अब इसका उपनाम नाला पढ़ गया था जिसका पूरा श्रेय सल्तनत और उसके पड़ोसियो को जाता है, बहुत सारे झाग और गंदा स्याह पानी, जो किसी के मन जितना गहरा था, कुछ एक नाव भी थी वहा जो हेरान कर रही थी की लोग यह भी अस्थीया विसर्जित करने आते है, पूजा पाठ करने आते है, आखिर नाले मे डुबकी लगा कर किसको क्या मोक्ष मिलेगा फिर सोच विचार करने के बाद लगा ठीक ही है

, इंसान का मन इस नाले नुमा नदी से कहा साफ होगा । सब ऐसे ही है अंदर से बाहर से चाहे कितना भी साफ सुथरे बन कर दिखाए, और मै भी कहा इन सबसे अलग हूँ घर से मैं भी तो आ गई ना बिना कुछ कहे और बेवकूफों की तरह सोच रही थी की कोई रोकेगा मुझे पागल लड़की को इतना भी नहीं पता की किसी को पता भी तो हो की घर छोड़ रही हो,और छोटी छोटी बाते तो सब घरों में होती है अंतर मन की एक आवाज़ सर दर्द कर रही थी। अब मुझे भी याद नहीं है की बात शुरु कहा से हुई थी, इन्ही सब उधेड़ बुन मे दिन कब ढाल गया पता नहीं लेकिन यमुना अब खुसुरत लग रही थी, सूरज यह भी डूबता हुआ लगता था किसी घुबसूरत तस्वीर जैसा वो कहते है ना पिक्चर परफेक्ट बिल्कुल वही।

शायद जब मन ऊब जाए घर से तो सफर पर निकलना चाहिए और आप बेहतर महसूस करते है पहले से और कई गुणा बेहतर है ये उस जगह रुक कर तनाव बड़ाने से, उसी जगह फसे रहने से लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता की आप भागे परिस्थितिओ से और जब आप खुश होते है तब आपको अच्छा लगता है सब कुछ और आप देखने लगते है सभी कुछ सकरात्मकता से,

आज इतना तो समझ आ ही गया|

 

मुझे आज तक कई तोहफे मिले है लेकिन उन सभी तोहफों मे 2 मेरे दिल की उस गहराई ने पसंद किए जहा सारे राज़ दफन है | पहला तोहफा

मैं धूल हूँ तुम कुमकुम रहना,

मैं मैं ही रहूँ तुम तुम रहना   

कभी लगता था कि कैसे लगता होगा उन प्रेमिकाओ को जिन्ह तोहफे मे मिलती होगी कविता या नज़्म | जब वो सुनती होगी उन्हे तब खुद पर गुरूर हो जाता होगा और बताती रहती होंगी ये मेरे लिए लिखी है इसकी प्रेरणा में हूँ और लोग देखते होंगे बड़े अदब के साथ , लेकिन अफसोस सब लिखते-पढ़ते हुए भी आप अपने लिए बहुत कुछ लिख सकते है लेकिन किसी और की प्रेरणा बनने का सोभाग्य नहीं मिलता सभी को| फिर किसी के द्वारा कुछ लिखा तोहफे में नहीं लिया जा सकता अपनी इच्छा से| जब तुमने मुझे पहला तोहफा दिया मैंने सभी से चुप कर दिल की राज़दार कोठरी में इसमे मेरा ही स्वार्थ था की नहीं बाटना चाहती थी किसी से इस तोहफे को | तब लगा नहीं था कि तुम्हारे ना रहने पर वो तोहफा इतना अज़ीज़ हो जाएगा की मेरी हर कॉपी के पीछे वो लिखा करूंगी फिर तुम्हारे नाम के हर्फ़ बार बार अपने नाम के साथ से लिखूँगी | पहले तोहफे से दूसरे तोहफे का सफर बहुत छोटा था इतना छोटा की उसे करते हुए पता ही नहीं चल की ये अंत है| अब उन सभी कॉपीयों के पिछले पन्ने जल्द फाड़ देने होंगे और नफरत करनी होगी कुमकुम से और हो भी क्यों ना नफरत| मुझे कुमकुम बनाने वाले तुम थे अगर तुम ही नहीं रहे तो मैं भला कुमकुम कैसे रह सकती हूँ?

रोटी कपड़ा और मकान के साथ साथ

तुम्हारा प्यार भी शामिल है

मेरी बुनियादी जरूरतों मैं

ठीक इसी तरह जब तुमने बताया मेरे प्रेम को बुनियादी जरूरत तो उसे भी मन की उस राज़दार कोठरी मे छुपाना ठीक समझा क्योंकि नहीं बातन चाहती थी ये भी किसी से| भला प्रेम भी बुनियादी जरूरत हो सकता है क्या ? ये पहला प्रश्न और दूसरा क्या सच में प्रेम बुनियादी जरूरत होता है तुम्हारी ? लेकिन अब जब तुम नहीं हो तो मैं जान गई हूँ दूसरे प्रश्न का उत्तर | जो तुम थे वो नहीं रहे और मैं भी कहाँ वो रही हूँ जो तुमने मुझे बनाया था | शायद हम हर इंसान के साथ अलग होते है सभी के साथ अलग व्यवहार होता है और कुछ इंसान हमे नया इंसान बनाते है| और जाते वक्त वो नया इंसान जो उन्होंने बनाया होता है वो ले जाते ही अपने साथ |

 

महामारी

महामारी

एक दिन सभी बुरे सपनों का अचानक से सच हो जाना | जो आपने देखे थे रात के स्याह अंधेरे में और अब आपको दिन की रोशनी में करना है उन सभी का ………

अपने देखा था सपने में आप रह गए है घर में अकेले और अचानक टूट गई आपकी नींद और सच मे अकेले रहना होगा उन सभी लोगों के बिना जिनसे आप रोज मिलते है, आप उन्हे बस दूर से देख सकते है छू नहीं सकते,मिल नहीं सकते |

अपने घर में बंद होने से भी बुरा क्या है पता है?

ऐसे घर मे बंद होना जहां आपकी सबसे बुरी याद जुड़ी हो , घर में रहना उन ग्रहणियों से पूछना चाहिए जो घरेलू हिंसा की शिकार है और इंतजार करती है सवेरे का की कब उनके पति दफ्तर जाए और वो लें थोड़ी बेखोफ साँसे; उन बेल्टों के निशानों पर मरहम लगा सके| वो जो चेहरे पर निशान है थप्पड़ का उस पर दवाई लगाई जाए और कुछ खाया जाए, अपने हर दिन मरते शरीर मे थोड़ी-सी साँस फुक कर अगली शाम की तयारी की जाए फिर वही चक्र चलेगा और यही सब दोहराया जाएगा ऐसे में घर मे 24 घंटे उसी इंसान के साथ रहना कैसा लगता होगा ?

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

आप वेश्यावृति के इतने खिलाफ है कि एक आदर्श समाज इनके बारे में बात करने को भट गलत मानता है क्योंकि बात करना गलत है इसलिए इनके बारे में सोचना तो आपको और भी गलत बना देता है वो सभी वैश्या जो आपके मासिक फोन बिल से भी कम किमत मे आपके साथ कुछ घंटे गुज़ारती है lockdown की स्तिथि में उनका गुज़ारा कैसे हो रहा होगा ? लेकिन हमें क्या समाज में उनका कोई स्पष्ट स्थान नहीं है और हो भी क्यू वो सभी लोग जो जिम्मेदार है उनके इस दलदल तक पहुचने में वो सभी अपने घरों में अपनें परिवारों के साथ है |

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

वो लोग जो इस उम्मीद मे रुक गए | सरकार के कहने पर अभी उनका मकान मालिक उनसे कुछ महीने किराया नहीं लेगा और खाने का इंतेज़ाम सरकार कर ही रही है ऐसे लोग जब पहुचते है सरकारी सेंटर तब खड़ा कर दिया जाता है इन्हे लंबी कतारों मे जहा पक्षपात होता है जानने वालों और अनजान लोगों के बीच ; कड़ी धूप मे और भूक से बिलबिलाते अपने बच्चों को समझाया जाता है घर लोटने के बाद आज जितना मिला है| उसी से गुज़ारा करलो कल सुबह जाकर लाइन मे लगेंगे तो ज्यादा ले आएंगे फिर कहा जाता है मकान मालिक से की जैसे ही काम मिलेग आपका किराया चुका दिया जाएगा हमे यहाँ रहने दीजिए और गिड़गिड़ाया जाता है अपने मालिक के सामने की आप हमारी बची हुई दिहाड़ी दे दें ताकि हम अपने बच्चों को खाना खिला सके और जवाब मिलता है दूर रह कर बात करो हमें भी कोरोना करना है क्या …….

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

ऐसे छात्र जो इस उम्मीद में थे जल्द डिग्री पूरी कर लेंगे फिर जैसे तैसे नोकरी ढूंढ कर घर वालों का बोझ कम करेंगे वो बंद है किराये के कमरें में उम्मीद में की जल्द सब ठीक हों जाएगा | वो लोग जिन्हे हर महीने घर में कुछ रकम भेजनी होती है वो सोच रहें है उनके घरवालें कैसे कर रहे होंगे गुज़ारा

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

वो सभी लोग जो अपनी भूमिका और कर्तव्य निभा रहें है| दिन रात एक करके काम कर रहें है इस महामारी से लोगों को बचा रहें है | और अपनी जान गवा रहे है जिन्हे कल क्या होगा मालूम नहीं है अपने परिवार से दोबारा मिलना होगा भी की नहीं, पता नहीं रोज अपनी आँखों के सामने लोगों को मरता देख रहे है और इतना असहाये खुद को कभी पहले महसूस नहीं किया है | परिवार का कोई बुजुर्ग भी अगर दम तोड़ता है तो बुरा लगता है ऐसे में जब लाखों लोगों को वक्त से पहले जाते देखना मन को पहुचाता है दुख| अफसोस को चेहरे पर ना दिखाते हुए हजारों-लाखों लोगों की हिम्मत बन रहें है यही लोग |

ऐसे बहुत से लोग है जो इन्ही के समानांतर महामारी का सामना कर रहे है और इस उम्मीद में है की जल्द सब ठीक ही जाएगा और ज़िंदगी फिर पटरी पर आ जाएगी |

अगर हम सब मिलकर एक दूसरे की मदद करें तो ऐसा जल्द हो जाएगा |

Create your website at WordPress.com
Get started