महामारी

महामारी

एक दिन सभी बुरे सपनों का अचानक से सच हो जाना | जो आपने देखे थे रात के स्याह अंधेरे में और अब आपको दिन की रोशनी में करना है उन सभी का ………

अपने देखा था सपने में आप रह गए है घर में अकेले और अचानक टूट गई आपकी नींद और सच मे अकेले रहना होगा उन सभी लोगों के बिना जिनसे आप रोज मिलते है, आप उन्हे बस दूर से देख सकते है छू नहीं सकते,मिल नहीं सकते |

अपने घर में बंद होने से भी बुरा क्या है पता है?

ऐसे घर मे बंद होना जहां आपकी सबसे बुरी याद जुड़ी हो , घर में रहना उन ग्रहणियों से पूछना चाहिए जो घरेलू हिंसा की शिकार है और इंतजार करती है सवेरे का की कब उनके पति दफ्तर जाए और वो लें थोड़ी बेखोफ साँसे; उन बेल्टों के निशानों पर मरहम लगा सके| वो जो चेहरे पर निशान है थप्पड़ का उस पर दवाई लगाई जाए और कुछ खाया जाए, अपने हर दिन मरते शरीर मे थोड़ी-सी साँस फुक कर अगली शाम की तयारी की जाए फिर वही चक्र चलेगा और यही सब दोहराया जाएगा ऐसे में घर मे 24 घंटे उसी इंसान के साथ रहना कैसा लगता होगा ?

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

आप वेश्यावृति के इतने खिलाफ है कि एक आदर्श समाज इनके बारे में बात करने को भट गलत मानता है क्योंकि बात करना गलत है इसलिए इनके बारे में सोचना तो आपको और भी गलत बना देता है वो सभी वैश्या जो आपके मासिक फोन बिल से भी कम किमत मे आपके साथ कुछ घंटे गुज़ारती है lockdown की स्तिथि में उनका गुज़ारा कैसे हो रहा होगा ? लेकिन हमें क्या समाज में उनका कोई स्पष्ट स्थान नहीं है और हो भी क्यू वो सभी लोग जो जिम्मेदार है उनके इस दलदल तक पहुचने में वो सभी अपने घरों में अपनें परिवारों के साथ है |

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

वो लोग जो इस उम्मीद मे रुक गए | सरकार के कहने पर अभी उनका मकान मालिक उनसे कुछ महीने किराया नहीं लेगा और खाने का इंतेज़ाम सरकार कर ही रही है ऐसे लोग जब पहुचते है सरकारी सेंटर तब खड़ा कर दिया जाता है इन्हे लंबी कतारों मे जहा पक्षपात होता है जानने वालों और अनजान लोगों के बीच ; कड़ी धूप मे और भूक से बिलबिलाते अपने बच्चों को समझाया जाता है घर लोटने के बाद आज जितना मिला है| उसी से गुज़ारा करलो कल सुबह जाकर लाइन मे लगेंगे तो ज्यादा ले आएंगे फिर कहा जाता है मकान मालिक से की जैसे ही काम मिलेग आपका किराया चुका दिया जाएगा हमे यहाँ रहने दीजिए और गिड़गिड़ाया जाता है अपने मालिक के सामने की आप हमारी बची हुई दिहाड़ी दे दें ताकि हम अपने बच्चों को खाना खिला सके और जवाब मिलता है दूर रह कर बात करो हमें भी कोरोना करना है क्या …….

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

ऐसे छात्र जो इस उम्मीद में थे जल्द डिग्री पूरी कर लेंगे फिर जैसे तैसे नोकरी ढूंढ कर घर वालों का बोझ कम करेंगे वो बंद है किराये के कमरें में उम्मीद में की जल्द सब ठीक हों जाएगा | वो लोग जिन्हे हर महीने घर में कुछ रकम भेजनी होती है वो सोच रहें है उनके घरवालें कैसे कर रहे होंगे गुज़ारा

क्या इसके समानांतर कुछ हो रहा है ?

वो सभी लोग जो अपनी भूमिका और कर्तव्य निभा रहें है| दिन रात एक करके काम कर रहें है इस महामारी से लोगों को बचा रहें है | और अपनी जान गवा रहे है जिन्हे कल क्या होगा मालूम नहीं है अपने परिवार से दोबारा मिलना होगा भी की नहीं, पता नहीं रोज अपनी आँखों के सामने लोगों को मरता देख रहे है और इतना असहाये खुद को कभी पहले महसूस नहीं किया है | परिवार का कोई बुजुर्ग भी अगर दम तोड़ता है तो बुरा लगता है ऐसे में जब लाखों लोगों को वक्त से पहले जाते देखना मन को पहुचाता है दुख| अफसोस को चेहरे पर ना दिखाते हुए हजारों-लाखों लोगों की हिम्मत बन रहें है यही लोग |

ऐसे बहुत से लोग है जो इन्ही के समानांतर महामारी का सामना कर रहे है और इस उम्मीद में है की जल्द सब ठीक ही जाएगा और ज़िंदगी फिर पटरी पर आ जाएगी |

अगर हम सब मिलकर एक दूसरे की मदद करें तो ऐसा जल्द हो जाएगा |

Published by CHHAYA GAUTAM'S BLOGS.....

Namaste 🙏 Welcome 🤗 Bhartiye-Delhite Writing is mine habit. Wana talk ..? Twitter- chhaya gautam

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