Again late …..

तुम्हें वक्त देखना नहीं आता तो घड़ी पहनते ही क्यों हो और अगर घड़ी देखने का वक्त नहीं होते व्यस्त होते हो तो अलार्म सेट कर लिया करो लंच पर मिलन था हमे डिनर का वक्त हो गया है अब {गुस्से में उसने बोला}

हाँ हाँ ठीक है अगली बार से नहीं होगा ऐसा वादा रहा {अपने कान पकड़ते हुए मैंने बोला}

कब से मेरा दिमाग खाया जा रहा है अब नहीं लग रही भूक | चलो अब जल्दी {उसका हाथ पकड़के चलते हुए मैंने कहा}

साथ चलें ही थे कि कुछ दूरी पर हमें दिखा एक पार्क और रुक गए दोनों यादों के भवर में कैसे बचपन में स्कूल के बाद घर आते वक्त झूलते थे और कॉलेज में भी यही सब जारी रहा ऐसे ही किसी पार्क में,नौकरी कि दौड़ ने हम सें ये सब जाने कब छीन लिया |

Published by CHHAYA GAUTAM'S BLOGS.....

Namaste 🙏 Welcome 🤗 Bhartiye-Delhite Writing is mine habit. Wana talk ..? Twitter- chhaya gautam

4 thoughts on “Again late …..

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